इस टूल के बारे में
आयु बताना आसान लगता है और निकालना उतना नहीं, क्योंकि हर महीना बराबर लंबाई का नहीं होता। 6 मार्च से 30 नवंबर तक उलटी गिनती दिमाग़ में करने बैठें तो एक मिनट लगता है और दो बार में दो अलग जवाब आते हैं। यहाँ वही हिसाब हर बार एक ही तरीक़े से होता है — पहले पूरे साल, फिर बचे हुए पूरे महीने, फिर उसके बाद बचे दिन।
टेढ़े मामले वही हैं जिन्हें जानना ज़रूरी है। 31 तारीख़ की जन्मतिथि की सालगिरह तीस दिन वाले महीने में होती ही नहीं, इसलिए टूल 30 लेता है। 29 फ़रवरी की सालगिरह चार में से तीन साल नहीं आती, इसलिए 28 फ़रवरी ली जाती है। दोनों तारीख़ें सीधी कैलेंडर तारीख़ मानी जाती हैं, समय के पल नहीं, इसलिए किसी दूसरे टाइमज़ोन वाले फ़ोन पर पेज खोलने से नतीजा एक दिन इधर-उधर नहीं होता।
साल-महीने-दिन वाली पंक्ति के साथ कुल दिनों की गिनती भी मिलती है, और अक्सर फ़ॉर्म पर यही माँगी जाती है, जहाँ उम्र नहीं बल्कि अवधि पूछी जा रही हो। न कुछ अपलोड होता है, न कुछ सहेजा जाता है — गणना उसी पेज में होती है जो आपके सामने खुला है, और भरी हुई जन्म तिथि पेज बंद करते ही ख़त्म।
इस टूल का इस्तेमाल कैसे करें
- जन्म तिथि भरें। तारीख़ ख़ुद लिखें या कैलेंडर से चुनें। 29 फ़रवरी समेत हर तारीख़ चलती है।
- “किस तारीख़ तक की आयु” तय करें। यह आज की तारीख़ पर खुलती है। किसी फ़ॉर्म की कट-ऑफ़ तारीख़ पर आयु चाहिए तो वही भर दें।
- नतीजा पढ़ें। पहले साल, महीने और दिन। उसके नीचे सीधा हिसाब — दोनों तारीख़ों के बीच कुल कितने दिन बीते।
यह टूल क्या नहीं करता
- यह किसी उम्र-सीमा या पात्रता के नियम नहीं जानता। आयु बता देता है; शर्त अपने फ़ॉर्म की मौजूदा सूचना में ख़ुद जाँचें।
- यह पूरी तारीख़ों पर काम करता है, दिन के समय पर नहीं। घंटों या मिनटों में आयु नहीं मिलेगी।
- सिर्फ़ ग्रेगोरियन तारीख़ें पढ़ता है। विक्रम संवत, हिजरी या तमिल पंचांग की तारीख़ पहले बदलनी पड़ेगी।
- भरी हुई तारीख़ कहीं सहेजी नहीं जाती। पेज दोबारा लोड करते ही वह चली जाती है।
आम सवाल
फ़ोन का टाइमज़ोन अलग हो तो क्या जवाब बदल जाएगा?
नहीं। दोनों तारीख़ें UTC में सीधी कैलेंडर तारीख़ की तरह ली जाती हैं, किसी घड़ी के पल की तरह नहीं। यह जान-बूझकर किया गया है — स्थानीय समय से गिनने पर जन्मदिन एक दिन आगे या पीछे खिसक सकता है, और एक दिन का यही फ़र्क़ फ़ॉर्म पर भारी पड़ता है।
जन्म 31 तारीख़ को हुआ है। तीस दिन वाले महीने में क्या होता है?
अप्रैल, जून, सितंबर और नवंबर में 31 तारीख़ होती ही नहीं, इसलिए महीने का आख़िरी मौजूद दिन यानी 30 लिया जाता है। ऐसा न करें तो तारीख़ अगले महीने की पहली में सरक जाएगी और उसके बाद की सारी गिनती एक दिन ग़लत हो जाएगी।
29 फ़रवरी की जन्मतिथि चलेगी?
हाँ। लीप वर्ष में सालगिरह 29 फ़रवरी को ही पड़ती है। बाक़ी सालों में वही नियम लगता है और 28 फ़रवरी ली जाती है, यानी उम्र फ़रवरी ख़त्म होते ही बढ़ती है, 1 मार्च को नहीं।
नतीजे की दोनों पंक्तियों में फ़र्क़ क्या है?
पहली कैलेंडर के हिसाब से है — पूरे साल, फिर बचे पूरे महीने, फिर बचे दिन। दूसरी सिर्फ़ दिनों की गिनती है, जिसमें यह मायने नहीं रखता कि कौन सा महीना कितने दिन का था। अंतर दोनों एक ही बताते हैं।
क्या आगे की तारीख़ डाल सकते हैं?
हाँ। “किस तारीख़ तक” वाली तारीख़ जन्म तिथि के बराबर या उसके बाद की कोई भी हो सकती है। मना यह तभी करता है जब दूसरी तारीख़ पहले की हो, क्योंकि वह आयु होती ही नहीं।