इस टूल के बारे में
कुछ फ़ॉर्म आठ अलग-अलग अपलोड के बजाय एक आर्काइव माँगते हैं, और कुछ दफ़्तर बस इतना चाहते हैं कि सब कुछ एक फ़ाइल में हो जिसे आगे बढ़ाया जा सके। यह टूल आपके पहले से तैयार दस्तावेज़ों को एक ZIP में रखता है, आपके चुने क्रम में नंबर लगाता है, और अंदर क्या-क्या है इसकी एक सादी सूची भी डाल देता है।
काम की बात नंबर लगाना ही है। दस फ़ाइलें एक फ़ोल्डर में डालिए और फ़ाइल मैनेजर उन्हें वर्णमाला के हिसाब से लगा देगा — मार्कशीट आवेदन फ़ॉर्म से पहले आ जाएगी और फ़ोटो कहीं बीच में जा गिरेगी। यहाँ आप तीरों से क्रम तय करते हैं और हर फ़ाइल के आगे 01-, 02-, 03- लग जाता है, जो आर्काइव जहाँ भी खुले वहीं वह क्रम पकड़े रखता है। उनके साथ रखी manifest.txt में हर नाम के आगे उसका ठीक-ठीक बाइट लिखा होता है, ताकि दूसरी तरफ़ बैठे व्यक्ति को दिख जाए कि रास्ते में कुछ छूटा नहीं।
अंदर की किसी चीज़ को छेड़ा नहीं जाता। हर फ़ाइल के बाइट आर्काइव में जस के तस उतरते हैं, और ZIP जान-बूझकर बिना कंप्रेशन के बनती है — पहले से दबी हुई JPEG या PDF को दूसरी बार दबाने से मिलती है कुछ बाइट की बचत और लगते हैं धीमे फ़ोन पर असली सेकंड। इसका सीधा मतलब यह भी है कि यह टूल बहुत बड़ी या ग़लत फ़ॉर्मैट वाली फ़ाइल को नहीं बचा सकता। पहले वह ठीक कीजिए, फिर पैक कीजिए। और पैक करने से भी पहले यह पक्का कर लीजिए कि जहाँ जमा करनी है वहाँ ZIP चाहिए भी या नहीं — अच्छे-ख़ासे पोर्टल हर दस्तावेज़ अलग माँगते हैं और आर्काइव लौटा देते हैं।
पूरी ZIP आपके ब्राउज़र में बनती है। दस्तावेज़ आपके डिवाइस की मेमोरी में पढ़े जाते हैं, आपके ही प्रोसेसर से ज़िप होते हैं और डाउनलोड के रूप में वापस मिल जाते हैं। कुछ भी अपलोड नहीं होता, इसलिए बड़ा बंडल उतना ही समय लेता है जितना आपके फ़ोन को चाहिए, एक सेकंड ज़्यादा नहीं।
इस टूल का इस्तेमाल कैसे करें
- अपनी तैयार फ़ाइलें जोड़ें। किसी भी तरह की फ़ाइलें, मिली-जुली भी। हर फ़ाइल 50 MB तक और कुल 100 MB तक। उन्हें पहले पूरी तरह तैयार कर लीजिए — यह क़दम सिर्फ़ पैक करता है।
- मनचाहा क्रम लगाएँ। हर फ़ाइल के पास दिए तीरों से उसे पहले या बाद में ले जाइए। यही क्रम ZIP के अंदर की क्रम-संख्या बनता है, तो उन्हें उसी सिलसिले में रखिए जिसमें फ़ॉर्म ने गिनाया है।
- ZIP का नाम दें। शुरुआत “my-application” से होती है, 60 अक्षर तक। स्पेस और जिन चिह्नों से फ़ाइल सिस्टम को दिक़्क़त होती है, उनकी जगह अंडरस्कोर आ जाता है।
- चलाएँ और डाउनलोड करें। एक ZIP मिलेगी जिसमें आपकी फ़ाइलें आपके तय क्रम में 01-, 02-, 03- नामों के साथ होंगी, और साथ में manifest.txt जिसमें हर फ़ाइल का नाम और ठीक-ठीक बाइट लिखे होंगे।
यह टूल क्या नहीं करता
- यह कुछ भी कंप्रेस नहीं करता। ZIP लगभग उतनी ही बड़ी होती है जितनी अंदर की फ़ाइलें।
- यह न माप बदलता है, न फ़ॉर्मैट, न घुमाता है, न कुछ ठीक करता है। फ़ाइलें बाइट-दर-बाइट वैसी ही रहती हैं।
- यह कुछ भी जाँचता नहीं — न साइज़, न फ़ॉर्मैट, न सामग्री — और न बता सकता है कि पोर्टल आर्काइव या उसके अंदर की चीज़ें स्वीकार करेगा।
- यह ZIP पर पासवर्ड नहीं लगा सकता और न उसे एन्क्रिप्ट करता है।
- फ़ाइलों के नाम साफ़ किए जाते हैं: अक्षर, अंक, बिंदु, हाइफ़न और अंडरस्कोर के अलावा सब अंडरस्कोर बन जाता है, और लंबे नाम छोटे कर दिए जाते हैं।
आम सवाल
क्या पैक करने से फ़ाइलें छोटी हो जाती हैं?
नहीं। ZIP बिना कंप्रेशन के बनती है, इसलिए वह अंदर डाली गई फ़ाइलों के जोड़ के बराबर ही निकलती है। यह जान-बूझकर है — पहले से कंप्रेस हो चुकी JPEG या PDF को ZIP के अंदर दोबारा दबाने से बचत लगभग शून्य होती है और पुराने फ़ोन पर वक़्त लगता है। फ़ाइलें छोटी चाहिए तो पैक करने से पहले छोटी कर लीजिए।
क्या मेरी फ़ाइलों में कोई बदलाव होता है?
बाइट ज्यों के त्यों कॉपी होते हैं। कुछ भी दोबारा एन्कोड, रिसाइज़, घुमाया या बदला नहीं जाता। सिर्फ़ नाम बदलता है — आगे दो अंक जुड़ते हैं और अटपटे चिह्न हटते हैं। जो अंदर जाता है, वही बाहर आता है।
manifest.txt में क्या होता है?
ZIP की हर फ़ाइल का नाम और उसका बाइट में आकार, एक छोटी भूमिका के साथ जिसमें लिखा है कि फ़ाइलें जैसी दी गई थीं वैसी ही रखी गई हैं और अपनी पोर्टल की शर्तें ख़ुद जाँच लें। यह इसलिए है कि जो भी आर्काइव खोले, उसे एक नज़र में दिख जाए कि कुछ छूटा नहीं।
फ़ाइलों के नाम के आगे नंबर क्यों लगते हैं?
ताकि क्रम बना रहे। ZIP का अपना कोई क्रम नहीं होता और फ़ाइल मैनेजर वर्णमाला से लगाते हैं, जिससे दस्तावेज़ बिखर जाते हैं। 01- से 09- तक का उपसर्ग उन्हें आपके तय क्रम में रखता है।
क्या पोर्टल ZIP स्वीकार करेगा?
तभी, जब वह ZIP माँगता हो। बहुत से फ़ॉर्म हर दस्तावेज़ अलग-अलग अपलोड करवाते हैं और आर्काइव सीधे नकार देते हैं। इस पर मेहनत लगाने से पहले जिस साइट पर आवेदन कर रहे हैं उसके निर्देश देख लीजिए।
क्या यह जाँचता है कि मेरे दस्तावेज़ सही हैं?
बिल्कुल नहीं। यह न साइज़ देखता है, न फ़ॉर्मैट, न माप, न सामग्री। वह जाँच चाहिए तो इससे पहले “फ़ाइल साइज़ जाँचें” टूल चला लीजिए, और अपने पोर्टल के निर्देश तो हर हाल में पढ़िए।